मदरसों के नए मानकों को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, 1 सितंबर को अगली तारीख

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में मदरसों और स्कूलों से जुड़े उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों और मानकों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए अब तक दाखिल नहीं किए गए दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की गई।
याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।
दरअसल, ऊधमसिंह नगर की केबीएन सोसाइटी द्वारा वर्ष 2006 से मदरसों का संचालन किया जा रहा है। इन संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी प्रदान की जाती है और इन्हें उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त है।
याचिका में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत मदरसा और स्कूली शिक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कम समय में नए मानकों को पूरा करना मदरसों के लिए मुश्किल है। यदि निर्धारित मानकों को पूरा नहीं किया गया तो आगामी शैक्षणिक सत्र में इन संस्थानों के बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है।
याचिका के अनुसार, इन संस्थानों में करीब 550 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। संस्थानों के बंद होने की स्थिति में इन छात्रों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 30 का भी हवाला दिया है। इसमें धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने के मौलिक अधिकार का प्रावधान है।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता इमरान अली ने पैरवी की। अब हाईकोर्ट इस मामले में 1 सितंबर को आगे की सुनवाई करेगा।



