पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन, प्रदेशभर में शोक की लहर

देहरादून। भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता के निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर सुबह से ही राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, सैन्य अधिकारियों और समर्थकों का पहुंचना जारी रहा।

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) खंडूड़ी अपने सादगीपूर्ण जीवन, साफ-सुथरी राजनीति और कठोर प्रशासनिक निर्णयों के लिए जाने जाते थे। उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें ईमानदारी और सुशासन का प्रतीक माना जाता रहा।

पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि “जनरल खंडूड़ी ने भारतीय सेना में राष्ट्रसेवा और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता तथा सुशासन का जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनका निधन उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।”

अटल बिहारी वाजपेयी के भरोसेमंद नेता रहे खंडूड़ी

अटल बिहारी वाजपेयी भुवन चंद्र खंडूड़ी को सक्रिय राजनीति में लेकर आए थे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और जल्द ही पार्टी नेतृत्व के विश्वासपात्र नेताओं में शामिल हो गए। पहली बार सांसद बनने के बाद उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया।

1999 में वाजपेयी सरकार में सड़क परिवहन मंत्री के रूप में उन्होंने देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क परियोजनाओं को नई गति दी। भारत के आधुनिक हाईवे नेटवर्क के विकास में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।

दो बार संभाली उत्तराखंड की कमान

साल 2007 में भाजपा ने उत्तराखंड की कमान खंडूड़ी को सौंपी। उन्होंने 2007 से 2009 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। बाद में राजनीतिक बदलावों के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा, लेकिन 2011 में भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।

उनके कार्यकाल में पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और विकास योजनाओं को प्राथमिकता दी गई। उनकी साफ छवि के कारण जनता के बीच उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त था।

प्रदेशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम

खंडूड़ी के निधन की सूचना मिलते ही भाजपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों ने शोक व्यक्त किया। कई जिलों में श्रद्धांजलि सभाओं की तैयारी की जा रही है। सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े होने के कारण पूर्व सैनिक संगठनों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद्र खंडूड़ी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा, जिन्होंने सत्ता से अधिक सिद्धांतों और जनसेवा को महत्व दिया।

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