दीवाली पर सिख क्यों मनाते हैं बंदी छोड़ दिवस? जानें कैसे 52 हिंदू राजाओं को श्री गुरु हरगोविंद सिंह ने करवाया था आजाद
सिख धर्म में दीवाली को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गुरु हरगोविंद सिंह जी …और पढ़ें
अमृतसर। दीवाली के दिन पूरा भारत रोशनी से जगमगा उठता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। लेकिन, दीवाली का महत्व सिर्फ हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। सिख धर्म में भी इस दिन को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।
श्री हरिमंदिर साहिब सुंदर लाइटों से सजाया जाता है, रात के समय दीपमाला होती है और आतिशबाजी होती है। जिसे देखने के लिए पूरे विश्व से लाखों की संख्या में लोग श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचते हैं। दरअसल, सिख समुदाय के लोग इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं। इसके पीछे सिख इतिहास न सिर्फ सिखों व पंजाब तक सीमित नहीं है।
इस दिन का एक ऐसी घटना है, जो हिंदुओं और ग्वालियर के साथ जुड़ी हुई है।
जानें क्या है बंदी छोड़ दिवस
मुगलों की नीतियों के खिलाफ सिख गुरुओं की लड़ाइयां लंबे समय तक चलीं। लेकिन ये घटना मुगल सम्राट जहांगीर के शासनकाल की है। इतिहास में जहांगीर को अत्याचारी राजा माना गया है। जिसने सारेआम हिंदुओं और सिखों का कत्लेआम करवाया।
जहांगीर उस दौरान सिख गुरु श्री हरगोविंद सिंह के बढ़ते हुए प्रभाव से काफी चिंता में था। जहांगीर के आदेश पर उन्हें ग्वालियर के किले में बंदी बना लिया गया। उस किले में उनके साथ अन्य 52 हिंदू राजाओं को भी बंदी बनाया गया था। बताया जाता है कि ग्वालियर किले के कारावास में जब सिख गुरु हरगोविंद सिंह जी को बंदी बनाकर लाया गया तो सभी हिंदू राजाओं ने उनका बेहद आदर-सम्मान किया।
वहीं, दूसरी और सिख उनके गुरु के बंदी बनाए जाने पर आक्रोश में थे। सिखों के आक्रोश और हालातों को देखते हुए कुछ सालों बाद जहांगीर ने उन्हें आजाद करने के घोषणा की। लेकिन, श्री गुरु हरगोविंद सिंह जी ने साफ मना कर दिया। उन्होंने शर्त रखी कि उनके साथ सभी हिंदू राजाओं को भी आजाद किया जाए।
जानें कैसे एक चोले से आजाद हुए 52 राजे
श्री गुरु हरगोविंद सिंह जी 52 हिंदू राजाओं को उनके साथ रिहा करने की शर्त पर अड़ गए। जहांगीर इसके लिए तैयार नहीं था। जहांगीर ने अपनी एक शर्त रख दी। जहांगीर की शर्त थी कि अपके चोले की कलियों को जितने राजे पकड़ लेंगे, वे आपके साथ बाहर जा सकेंगे।
ये सुन श्री गुरु हरगोविंद सिंह जी ने 52 कलियों वाला चोला बनवाया। हर राजे ने चोले की एक-एक कली को पकड़ लिया। जिसके बाद श्री गुरु हरगोविंद सिंह जी के साथ 52 हिंदू राजे ग्वालियर के किले से दीवाली के मौके पर आजाद हुए। ये चोला आज भी लुधियाना के गुरुद्वारा श्री चोला साहिब घुडानी कलां में संगत के दर्शनों के लिए रखा गया है।
श्री हरिमंदिर साहिब में हुई थी दीपमाला
ग्वालियर के किले से निकलने के बाद श्री गुरु हरगोविंद सिंह जी अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे। जहां उनका स्वागत दीये जलाकर किया गया। तब से लेकर आज तक दीवाली के दिन श्री हरिमंदिर साहिब में दीपमाला की जाती है और इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है।



