BJP की ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ पर मोहित डिमरी का हमला, बोले- पहले प्रदेश की बदहाल व्यवस्था सुधारें

उत्तराखंड में भाजपा नेताओं की ओर से निकाली जा रही ‘लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ यात्रा’ पर मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सवाल उठाते कहा कि केंद्र से लेकर उत्तराखंड तक भाजपा की सरकार है। पुलिस-प्रशासन और तमाम जांच एजेंसियां भी सरकार के अधीन हैं। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी के नेता आखिर किससे लोकतंत्र को खतरा बता रहे हैं

भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ पर मोहित डिमरी का हमला
मोहित डिमरी ने कहा कि भाजपा का यह अभियान राजनीतिक विडंबना का उदाहरण है। जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा सत्ता में है, तो प्रदेश में अराजकता के लिए जिम्मेदार कौन है? अगर कानून-व्यवस्था बिगड़ी है और लोकतंत्र खतरे में है, तो इसकी जिम्मेदारी भी सरकार को लेनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की यात्राएं निकाल रही है।

डिमरी ने कहा कि एक ओर अंकिता भंडारी के माता-पिता आज भी अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अराजकता तब दिखाई देती है, जब अपराधियों के हौसले बुलंद हों, भू-माफियाओं को संरक्षण मिलने के आरोप लगें, प्रदेश की जमीनों पर बाहरी ताकतों का कब्जा बढ़े और युवाओं का भविष्य पेपर लीक व भर्ती घोटालों की भेंट चढ़ जाए।

जरूरी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे पहाड़ों के अस्पताल
डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। पहाड़ों के अस्पताल डॉक्टरों और जरूरी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण युवाओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार इन बुनियादी समस्याओं का समाधान करने के बजाय राजनीतिक यात्राओं में व्यस्त है।

मोहित डिमरी ने कहा कि भाजपा नेताओं को लोकतंत्र बचाने और अराजकता हटाने की चिंता है तो सबसे पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था सुधारनी चाहिए, जमीनों की लूट पर रोक लगानी चाहिए, युवाओं को रोजगार देना चाहिए और स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं को बेहतर बनाना चाहिए।

मोहित डिमरी ने कहा कि जनता ने भाजपा को सत्ता प्रदेश की सेवा, सुशासन और सुरक्षा के लिए सौंपी थी, न कि विपक्ष की तरह सड़कों पर उतरकर राजनीतिक प्रदर्शन करने के लिए। उत्तराखंड की जनता अब ऐसे राजनीतिक अभियानों के पीछे की मंशा समझ चुकी है।

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