बिना अर्जी मैसेज आने पर CEO ने दी सफाई, कहा- गलत नंबर की वजह से UP का मैसेज पहुंचा उत्तराखंड

भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी के फोन पर बिना किसी आवेदन यानी बिना फॉर्म-8 भरे के उनके वोटर लिस्ट के ब्योरे सुधार से जुड़े मैसेज आने के मामले पर उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने हालांकि तुरंत रुख साफ किया और दावा किया है कि यह किसी साजिश का हिस्सा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक आवेदक द्वारा फॉर्म में गलत मोबाइल नंबर दर्ज किए जाने की वजह से हुई तकनीकी चूक है। उत्तराखंड में वामपंथी नेता के मतदाता रिकॉर्ड से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। लेकिन सीईओ के आश्वासन के बावजूद इंद्रेश मैखुरी को चुनाव आयोग से मैसेज आ ही रहे है। गौरतलब है कि उप्र में ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं जहां लोगों के ब्योरे बिना अर्जी के ही इतने मूर्खतापूर्ण ढंग से बदल दिए गए कि वे वोट करने लायक ही नहीं रहे। मैखुरी का कहना है कि उन्हें मैसेज सीईओ उत्तराखंड या उप्र से या स्थानीय बीएलओ से नहीं आया यानी चुनाव आयोग ने अपना पूरा सिस्टम इतना केंद्रीकृत कर लिया है कि ब्योरे में सुधार की अर्जी मिलने का मैसेज भी भारत निर्वाचन आयोग से आ रहा है। अब यह साफ है कि वोटर से जुड़े जो छोेटे-मोटे काम बीएलओ या स्थानीय स्तर पर होते थे वे भी अब भारत निर्वाचन आयोग ने अपने हाथ में ले लिए हैं।

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लेकिन मैसेज तो अब भी आ रहेः इंद्रेश मैखुरी

भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने बताया कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चमोली के जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजने के बाद भी मैसेज आने का सिलसिला जारी है.
रविवार शाम उनको फिर मैसेज आया है कि उनकी तथाकथित एप्लिकेशन की फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट जमा कर दी गयी है। उन्होंने कहा यह अजीब है कि अब भी मैसेज आ रहे हैं।

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CEO ने दी सफाई: उप्र का है मामला, गलत नंबर दर्ज होने से हुआ भ्रम

मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने तुरंत संज्ञान लिया और ईमेल के जरिए इंद्रेश मैखुरी को पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मैसेज में दर्ज रेफरेंस आईडी उत्तराखंड की न होकर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की ‘सिकंदराबाद’ विधानसभा सीट से जुड़ी हुई है। सिकंदराबाद में किसी आवेदक ने मतदाता सूची में सुधार या नाम जोड़ने के लिए फॉर्म भरा था। आवेदन के दौरान उस व्यक्ति से अपना मोबाइल नंबर दर्ज करने में गलती हो गई, जो इत्तेफाक से इंद्रेश मैखुरी का नंबर था। इसी वजह से चुनाव आयोग के ऑटोमेटेड सिस्टम ने बीएलओ आवंटन और आवेदन स्वीकार होने के अपडेट्स मैखुरी के मोबाइल पर भेज दिए थे। उन्होंने आश्वस्त किया कि मैखुरी का नाम उत्तराखंड की मतदाता सूची में पूरी तरह सुरक्षित है।

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क्या था पूरा विवाद?

शुक्रवार और शनिवार को भाकपा (माले) लिबरेशन के उत्तराखंड राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी को चुनाव आयोग (ECI) की ओर से दो एसएमएस प्राप्त हुए थे। पहले मैसेज में मतदाता विवरण में संशोधन का आवेदन मिलने और दूसरे में बीएलओ (BLO) प्रीति रानी का नाम व मोबाइल नंबर आवंटित होने की बात कही गई थी चूंकि मैखुरी ने ऐसा कोई आवेदन नहीं किया था, इसलिए वे हैरान रह गए। उनका कहना था कि चमोली जिले के उनके पैतृक गांव मैखुरा की वोटर लिस्ट में उनका नाम पहले से ही सही दर्ज है।

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माले नेता ने पत्र लिखकर जताई थी नाम काटने की आशंका

अज्ञात मैसेज मिलने के बाद इंद्रेश मैखुरी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (नई दिल्ली), उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (देहरादून) और चमोली के जिला निर्वाचन अधिकारी (गोपेश्वर) को पत्र भेजकर विरोध जताया था। मैखुरी ने अपने पत्र में लिखा-“मैं भाकपा (माले) लिबरेशन का कार्यकर्ता हूं और  सरकार की नीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाता हूं। बिना किसी आवेदन के ऐसा मैसेज मिलना यह आशंका पैदा करता है कि क्या मतदाता सूची से मेरा नाम हटाने की कोई साजिश रची जा रही है? ऐसे मैसेजों से आम नागरिकों के मन में मताधिकार छिनने का डर पैदा होता है।” उन्होंने आयोग से मांग की थी कि उनके मतदाता विवरण में कोई बदलाव न किया जाए। हालांकि, अब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की विस्तृत सफाई आने के बाद संभवतः इस पूरे भ्रम और विवाद पर विराम लग गया है। लेकिन इंद्रेश मैखुरी को अब भी मै चुनाव आयोग के अतिकेंद्रीयकृत होने का सवाल अब भी अनुत्तरित है

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