अखिलेश यादव के ‘घुसपैठिया’ बयान पर सपा प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी का भाजपा पर पलटवार

हल्द्वानी

  • बोले—अखिलेश ने भाजपा की नफरत की राजनीति पर उठाए सवाल
  • संविधान और उत्तराखंड के सम्मान का पाठ पढ़ाने से पहले अपने बयानों पर विचार करे भाजपा : हल्द्वानी में समाजवादी पार्टी के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘घुसपैठिया’ संबंधी बयान को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के समय अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए गरीबों, मजदूरों और आम नागरिकों को बाहरी बताकर राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के बयान को संदर्भ से अलग कर पेश किया जा रहा है। सिद्दीकी ने कहा कि अखिलेश यादव का व्यंग्य भाजपा की कथित नफरत की राजनीति और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उठ रहे सवालों पर था। उन्होंने सवाल किया कि यदि बड़ी संख्या में घुसपैठिए होने के दावे किए जा रहे हैं, तो सरकार उनके खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि देश के नागरिकों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने और रहने का अधिकार है। ऐसे में आम नागरिकों को बाहरी बताने की राजनीति उचित नहीं है उत्तराखंड के सम्मान को लेकर भाजपा नेताओं की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्दीकी ने कहा कि अखिलेश यादव का प्रदेश से भावनात्मक जुड़ाव रहा है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड राज्य गठन की प्रक्रिया में मुलायम सिंह यादव की सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका थी। सिद्दीकी ने यह भी कहा कि केदारनाथ आपदा के दौरान अखिलेश यादव ने आर्थिक सहायता दी थी और अंकिता भंडारी प्रकरण में सांसद डिंपल यादव ने संसद में आवाज उठाई थी। सपा प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर धार्मिक आस्था, जोशीमठ की स्थिति, अंकिता भंडारी प्रकरण और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विवादित बयानों का सहारा ले रही है। वहीं, उन्होंने उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, मेट्रो, लैपटॉप वितरण और महिला सुरक्षा हेल्पलाइन जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए अपनी पार्टी के विकास कार्यों को गिनाया। सिद्दीकी ने कहा कि भाजपा को अखिलेश यादव के बयान को पूरे संदर्भ में समझना चाहिए और देवभूमि के सम्मान पर सवाल उठाने से पहले प्रदेश के वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता विकास और जनहित के मुद्दों पर फैसला करेगी।

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